Yeh kalam 

यह कलम, न जानें क्या

क्या लिख लेती है,॥.

यह कलम, न जानें क्या

क्या लिख लेती है,॥….♥
नाम तेरा, मेरे नामके 

साथ लिख लेती है,॥….♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥..♥

कभी यादोंके नश्तर, 

कभी ख्वाबोंके कनस्तर..,

कभी गीले-शिकवे जिंदगीके,

कभी पैगाम अजनबीके..,

कभी हाल-चाल हमारा 

साथ लिख लेती है,॥….

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

कभी सरल तो कभी दुश्वार, 

कभी तेरे-मेरे बिच 

भई हुई तकरार..,

नफरतमें, बीज 

प्यारका बो देती है..,॥..

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥..♥

कभी जनम तो कभी मरण, 

सन्देशे खुशियोंके,गमके 

आसार लिख लेती है,॥..

वो सारे प्यारभरे 

खत तेरे नामके, 

सिर्फ मेरे ही नाम से  

लिख लेती है,॥….♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

कभी मन्नतें, कभी झिल्लतें,

कभी मोहब्बतें, कभी तहोमतें.,

कभी कभी खुशहाली दिलकी,

कभी बरबादी जिगरकी..,

ये सारा इन्सानी रूहका

कारोबार, लिख लेती है,॥..

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

कभी विवाह किसीके, 

कभी सगाई किसीकी..,

कभी शादीके रस्मओ-

रिवाज लिख लेती है,॥..♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

कभी खुशियोकी बधाई, 

कभी अपनोंकी रूसवाई

कभी बन्धन प्यारका, 

कभी मोहब्बत से रिहाई..,

और कभी गुनाहोंकी 

सुनवाई लिख लेती है॥..♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है॥..♥

कहीं आस मिलनकी, 

कहीं प्यास मिलनकी..,

कभी चाहकी अंगडाई,

कभी हसरतोंकी पूरवाई.,॥..♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है॥..♥

क्भी कविता और कभी छंद..,

कभी शायरी तो कभी अभंग..,

ये बातें दिलकी सारी 

लिख लेती है ॥..

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है॥..♥

कभी बहार कभी 

बारिशकी फूहार..,

कभी पर्वतोकी पुकार, 

कभी बादलोंकी डकार..,

कुदरतके हर करिश्मेंको,

बेमिसाल बयां कर देती है॥..

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥..♥

कभी बंगाली तो कभी गुजराती.., 

कभी मराठी और कभी मलयाली..,

दिलकी सभी तमन्नाको 

हिन्दुस्तानीमें, लिख लेती है॥..

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

यह कलम, न जानें क्या 

क्या लिख लेती है,॥….♥

#रीपु 

2 pag ke baad by nikita lalwani 

Front cover page 

Back cover page 


2 pag ke baad 

The tital of book is very interesting. It self define the content of inside book. What happened after get two pag. 


Cover page is also good attractive from its black decorative color with glass of peg. It may become more adorable when it has two glass, with one is full and another one is empty. I think so. 


This book contains 14 such stories which done after 2peg. It defines universal basic truth in stories. As you going on reading all stories, you may fall in love more than with short stories before your simple attractions. 


Dr. Nikita lalwani does beautiful and charming work with this book. Impressed by her narrative style of writing. 


Here some quote I most like, 


Eleven minutes of pleasure bought for few clams. 


Bananas speak to you  through  her ghats. 


Education to please relative, marriage to please more unplease relative,  and the kids to please relative who have suffered all the other pleasure of life. 


There still lies a mist over what happened to her and how it led to the estrangement between us. 


After all book is very easy to read and understood with very ethnic lessons and causes of society. 


Ratings


Book cover and title – 3/5


Language and narration – 4/5


Storyline and plot – 3.5/5


Overall ratings – 3.4/5

Use kiya 

Use kiya

तेरे दुप्पटे को मफलर की तरह यूज़ किया 

हमनें रुपये को भी डालर की तरह यूज़ किया 
अपनी मझधार में कितनों को डुबाया तूने 

गहरी आँखों को समंदर की तरह यूज़ किया 
कल भी तो बस्ती में दंगाइयों का जलवा था 

हर पुलिसवाले को नौकर की तरह यूज़ किया 
ऐसा लहजा है के इस दिल पे ज़ख्म लगते हैं 

तूने हर बात को पत्थर की तरह यूज़ किया 
कल मुझे घेर लिया क़ातिलों की टोली ने 

तो अपने आप को लश्कर की तरह यूज़ किया 
जब जहाँ चाहा लगाया है किसी बाज़ी में 

मुझको भी ताश के जौकर की तरह यूज़ किया 
नया अंदाज़ दिया रोज़ ग़ज़ल को रीपु

तूने हर लफ्ज़ को ज़ेवर की तरह यूज़ किया 
#Riputhummar 

ज़िन्दगी 


जिन्दगी की दौड़ में,

तजुर्बा कच्चा ही रह गया…।

हम सीख न पाये ‘फरेब’

और दिल बच्चा ही रह गया…।

बचपन में जहां चाहा हँस लेते थे,

जहां चाहा रो लेते थे…।

पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए

और आंसुओ को तन्हाई..।

हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से…

देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में ..।

चलो मुस्कुराने की वजह ढुंढते हैं…

तुम हमें ढुंढो…हम तुम्हे ढुंढते हैं …..!

रीपु 

Half girl friend 

Kabhi chahat ko barsao na, 

Pyaar karna sokhao na, 
Banake muje apni dhadkan, 

Dil me apne basa lo na, 

Kabhi dil se dil lagao na, 

Muje apna banao na, 
Lekar tumhari baho me, 

Muje kuch mehsus karao na, 


Kabhi haq to jatao na, 

Hoon kya  me yeh batao na, 


Tumhari aakho se yeh duniya,  

Muje aakar dikhao na. 

Last strnza from the half girl friend movie song

First two strnza made by me.